भारत-रूस की आतंकवाद पर साझा रणनीति, सीमा पार आतंकी नेटवर्क और फंडिंग रोकने पर बढ़ेगा सहयोग

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भारत और रूस ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने पर सहमति जताई है। नई दिल्ली में आयोजित भारत-रूस आतंकवाद निरोधक संयुक्त कार्य समूह (जॉइंट वर्किंग ग्रुप ऑन काउंटर टेररिज्म) की 14वीं बैठक में दोनों देशों ने आतंकवाद के हर स्वरूप के खिलाफ मिलकर प्रभावी कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक के दौरान सीमा पार आतंकवाद, आतंकी संगठनों की गतिविधियों और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में दोनों देशों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और दिल्ली के लाल किला परिसर के पास हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने वाली किसी भी आतंकी घटना को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने ऐसे हमलों के दोषियों और उनके समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

भारत और रूस ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी नेटवर्क वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। इन संगठनों की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए दोनों देशों के सुरक्षा और खुफिया तंत्र के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा आतंकियों के सहयोगी नेटवर्क और उनके मुखौटा संगठनों पर भी संयुक्त कार्रवाई की दिशा में काम करने की बात कही गई।

बैठक में आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकना प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। दोनों देशों ने माना कि अवैध आर्थिक स्रोतों के माध्यम से आतंकी संगठनों को मिलने वाली सहायता उनकी गतिविधियों को बढ़ावा देती है। इसलिए संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की निगरानी, सूचना साझा करने और आर्थिक नेटवर्क पर कार्रवाई को और प्रभावी बनाने पर सहमति बनी।

इसके साथ ही डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग से पैदा हो रहे नए सुरक्षा खतरों पर भी चर्चा की गई। दोनों देशों ने माना कि इंटरनेट, सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान प्रणालियों का दुरुपयोग आतंकी संगठन तेजी से कर रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी सहयोग बढ़ाने और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में साझा प्रयास करने पर जोर दिया गया।

बैठक में उग्रवाद और कट्टरपंथ की बढ़ती प्रवृत्तियों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से बचाने और आतंकवाद के लिए होने वाली ऑनलाइन भर्ती पर रोक लगाने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करना समय की आवश्यकता है। इस दिशा में अनुभव और सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया।

भारत और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति में सूचीबद्ध आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का समर्थन दोहराया। दोनों देशों ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित संगठनों को किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहायता नहीं मिलनी चाहिए और उनके वित्तीय तथा लॉजिस्टिक नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करने के लिए वैश्विक सहयोग आवश्यक है।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा करते हुए उभरते आतंकी खतरों का आकलन किया। उन्होंने माना कि आतंकवाद लगातार नए रूपों में सामने आ रहा है, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों के बीच समय पर सूचना साझा करना और समन्वित कार्रवाई पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

भारत और रूस ने संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और यूरेशियन ग्रुप (ईएजी) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर साझा प्रयासों के बिना आतंकवाद जैसी चुनौती का प्रभावी समाधान संभव नहीं है।

बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और रूस की ओर से उप विदेश मंत्री दिमित्री ल्यूबिन्स्की ने की। इसमें दोनों देशों के विभिन्न मंत्रालयों, सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। प्रतिनिधियों ने आतंकवाद निरोधक सहयोग को और व्यावहारिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझावों पर भी विचार किया।

बैठक के समापन पर दोनों देशों ने भविष्य में आतंकवाद विरोधी सहयोग को और व्यापक बनाने पर सहमति जताई। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि भारत-रूस आतंकवाद निरोधक संयुक्त कार्य समूह की अगली बैठक आपसी सहमति से रूस में आयोजित की जाएगी, जहां दोनों देश अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करने के साथ आगे की रणनीति पर भी चर्चा करेंगे।