सरला भट हत्याकांड में यासीन मलिक का हलफनामा: केस लड़ने से इनकार, अदालत से मांगी मौत की सजा

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जेल में बंद जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख यासीन मलिक ने कश्मीरी पंडित महिला सरला भट की हत्या से जुड़े मामले में अदालत में 25 पेज का हलफनामा दाखिल किया है। हलफनामे में मलिक ने मामले में अपनी भूमिका से इनकार किया है और कहा है कि वह इस केस को आगे नहीं लड़ना चाहते।

मलिक ने अदालत से अपने लिए मौत की सजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि वह अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का बचाव नहीं करना चाहते। हालांकि उन्होंने सरला भट की हत्या में शामिल होने के आरोप को स्वीकार नहीं किया है और खुद को इस मामले में निर्दोष बताया है।

हलफनामे में मलिक ने दावा किया है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप वास्तविक पुलिस जांच पर आधारित नहीं हैं, बल्कि लंबे समय बाद तैयार की गई कहानी का हिस्सा हैं। उनका कहना है कि अगर उनके खिलाफ पहले से पर्याप्त सबूत थे, तो इतने वर्षों तक इस मामले में उन्हें आरोपी क्यों नहीं बनाया गया।

यह हलफनामा उस समय सामने आया है जब जांच एजेंसी की ओर से सरला भट की हत्या के मामले में चार्जशीट दाखिल की गई। मलिक ने चार्जशीट से जुड़े कुछ आरोपों और जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।

मलिक ने अपने हलफनामे में जांच अधिकारियों से हुई मुलाकात का भी जिक्र किया है। उनके अनुसार, जेल में अधिकारियों ने उनसे कुछ विशेष आरोपों को लेकर पूछताछ की थी। इनमें एक कथित नोट और सरला भट की हत्या से जुड़े आदेश का उल्लेख शामिल था।

हलफनामे में मलिक ने सवाल उठाया है कि यदि कथित नोट घटनास्थल से बरामद हुआ था और उसमें कुछ लोगों के नाम का उल्लेख था, तो उन लोगों को इतने वर्षों तक इस मामले में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। उन्होंने इसी आधार पर जांच की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं।

मलिक ने वर्ष 1990 में अपनी गिरफ्तारी का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि उस समय उनके खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत कई मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन सरला भट की हत्या के मामले में उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया था।

उन्होंने यह भी दावा किया कि अप्रैल 1990 में एक छापेमारी के दौरान एक इमारत से गिरने के बाद वह गंभीर हालत में थे और कुछ समय तक कोमा में रहे थे। मलिक के अनुसार, उस समय उनके जीवित होने को लेकर भी भ्रम की स्थिति थी। उन्होंने इसी आधार पर सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में वह किसी अपराध को अंजाम देने या उसके लिए निर्देश देने की स्थिति में कैसे हो सकते थे।

हलफनामे में मलिक ने अपनी पत्नी मुशाल हुसैन से विवाह समाप्त करने का फैसला लेने की बात भी लिखी है। उन्होंने इसकी वजह लंबी जेल और परिवार से लंबे समय से संपर्क नहीं हो पाने को बताया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें फोन कॉल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गईं।

मलिक ने अपनी बेटी के लिए भी भावनात्मक संदेश लिखा है और उसे अपने दादा-दादी से नियमित बातचीत करने की सलाह दी है। वहीं, सरला भट हत्याकांड में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर अंतिम फैसला अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।