गोरखपुर शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर माथाबारी गांव में गुरुवार को वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह पत्नी सरिता के साथ पहुंचे। उनके गांव पहुंचने पर सरस्वती गुरुकुल में विशेष स्वागत किया गया। इस दौरान ढोल-नगाड़ों के साथ उनका अभिनंदन किया गया।
गुरुकुल में एयर चीफ मार्शल और उनकी पत्नी का स्वागत फूल बरसाकर किया गया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद बच्चों से मुलाकात की और उनका अभिवादन स्वीकार किया। बच्चों से मिलते हुए उन्होंने उन्हें प्रोत्साहित किया और उनके साथ कुछ समय बिताया।
कार्यक्रम के दौरान एयर चीफ मार्शल की पत्नी सरिता ने सरस्वती गुरुकुल में तैयार की गई लाइब्रेरी का शुभारंभ किया। लाइब्रेरी शुरू होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई और ज्ञान से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक नई पहल की गई।
कार्यक्रम में गुरुकुल के छात्र-छात्राओं ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित नाटक की प्रस्तुति दी। बच्चों ने अपनी प्रस्तुति के जरिए पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद भारत की सैन्य कार्रवाई को मंच पर दिखाया।
बच्चों की प्रस्तुति देखकर वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया। प्रस्तुति के दौरान देशभक्ति का माहौल भी देखने को मिला और भारत माता की जय के जयकारे लगाए गए।
एयर चीफ मार्शल ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी से मिलकर उन्हें हमेशा खुशी होती है। उन्होंने बच्चों को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि आने वाले समय में देश की जिम्मेदारी इन्हीं के हाथों में होगी।
उन्होंने बच्चों से कहा कि उन्हें अपनी पढ़ाई के साथ अच्छे संस्कार भी हासिल करने चाहिए। उनके अनुसार जीवन में केवल सफलता हासिल करना ही जरूरी नहीं है, बल्कि एक अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
वायुसेना प्रमुख ने बच्चों को असफलता से डरने के बजाय लगातार प्रयास करते रहने की सीख दी। उन्होंने कहा कि जीवन में गिरना या असफल होना गलत नहीं है, लेकिन असफलता के बाद प्रयास छोड़ देना सही नहीं है। मेहनत और कोशिश करते रहने से आगे बढ़ने का रास्ता बनता है।
उन्होंने बच्चों से देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि देश सेवा केवल वर्दी पहनकर ही नहीं की जाती। व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में जाए, वह अपने काम और योगदान के जरिए देश और समाज की सेवा कर सकता है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को पढ़ाई के साथ अपने स्वास्थ्य, व्यवहार और संस्कार पर ध्यान देने की सीख दी गई। संदेश यही रहा कि मजबूत नींव और अच्छे संस्कार के साथ आगे बढ़ने वाला युवा भविष्य में देश और समाज के लिए बेहतर योगदान दे सकता है।

