मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध, उत्पादन-बिक्री पर रोक के आदेश

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मध्य प्रदेश सरकार ने एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद इस संबंध में आदेश जारी करने के निर्देश दिए।

एनालॉग पनीर को सामान्य पनीर के विकल्प के तौर पर तैयार किया जाता है। इसमें दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति वसा, स्टार्च और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कम कीमत के कारण एनालॉग पनीर की बाजार में मांग तेजी से बढ़ने की बात सामने आई है। इसी को देखते हुए सरकार ने इसकी बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक तरीके से दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही दूध से तैयार होने वाले पारंपरिक पनीर के उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

सरकार के सामने एनालॉग पनीर की बड़े स्तर पर होने वाली खपत भी एक प्रमुख मुद्दा है। अनुमान के मुताबिक मध्य प्रदेश में रोजाना करीब 300 से 400 क्विंटल एनालॉग पनीर की आवक और बिक्री हो सकती है।

इस हिसाब से इसकी मासिक खपत करीब 9 हजार से 12 हजार क्विंटल तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इतनी बड़ी मात्रा में इसकी बिक्री को देखते हुए सरकार ने अब इस पर सख्ती करने का फैसला लिया है।

एनालॉग पनीर को लेकर खाद्य सुरक्षा और लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े सवाल भी उठते रहे हैं। इसी मुद्दे पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भी चिंता जताई है और संबंधित राज्यों से जानकारी लेने की बात कही है।

आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने एनालॉग पनीर की बिक्री को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों से इस तरह के उत्पादों की बिक्री की अनुमति को लेकर जवाब मांगे जाने की बात कही है।

एनालॉग पनीर की पहचान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विशेषज्ञों और अधिकारियों के सामने यह चुनौती है कि खाद्य पदार्थों की जांच के दौरान ऐसे उत्पादों की सही पहचान और गुणवत्ता की प्रभावी तरीके से जांच कैसे की जाए।

मध्य प्रदेश से पहले कुछ अन्य राज्यों में भी एनालॉग पनीर के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। अब मध्य प्रदेश सरकार के फैसले के बाद प्रदेश में इसके उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

सरकार का कहना है कि प्रदेश में प्राकृतिक दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ दूध से बने वास्तविक पनीर के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। आने वाले समय में खाद्य विभाग की ओर से प्रतिबंध को लागू करने के लिए निगरानी और कार्रवाई की जा सकती है।