लोकसभा में मंगलवार को पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं को रोकने से जुड़े ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान सदन का माहौल कई बार बेहद गर्म हो गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच लगातार तीखी बहस, टोका-टोकी और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। चर्चा केवल विधेयक तक सीमित नहीं रही, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा पारदर्शिता और सरकार की नीयत जैसे मुद्दों तक पहुंच गई।
बहस के दौरान उस समय शोर-शराबा बढ़ गया जब तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी बोलने के लिए खड़े हुए। विपक्ष की ओर से लगातार व्यवधान की स्थिति बनी रही। इसी बीच टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा अपनी सीट से उठीं और चेयर से हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने चर्चा को शांतिपूर्ण तरीके से चलाने की बात कही, लेकिन सदन में शोर कम नहीं हुआ। इस पर पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने उन्हें बैठने के लिए कहा और ऊंची आवाज में बोलने से बचने की नसीहत दी। इस पूरे घटनाक्रम ने सदन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
इसके बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने अपनी स्पीच में शिक्षा व्यवस्था और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल समितियां बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली को ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ संचालित करने की जरूरत है। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि शिक्षा जैसे गंभीर विषय पर विशेषज्ञता और जवाबदेही सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।
प्रियंका गांधी के बयान पर सत्ता पक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि किसी मंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले आरोप बिना पर्याप्त आधार के नहीं लगाए जाने चाहिए। उन्होंने प्रियंका गांधी से अपने बयान पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। सदन में इस मुद्दे पर कुछ देर तक जोरदार हंगामा हुआ और कई सांसद एक साथ बोलने लगे, जिससे कार्यवाही प्रभावित हुई।
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे भी इस बहस में शामिल हुए और उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष अपने बयान वापस नहीं लेता, तो वे भी अपने पुराने राजनीतिक बयानों पर कायम रहेंगे। इस दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक नोकझोंक देखने को मिली। सदन का माहौल इतना गरम हो गया कि पीठासीन अधिकारी को बार-बार व्यवस्था बनाए रखने की अपील करनी पड़ी।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी प्रियंका गांधी की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी गंभीर आरोप को तथ्यों के साथ रखा जाना चाहिए और संसदीय परंपराओं का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि बिना पूर्व सूचना के ऐसे आरोप लगाना उचित नहीं है। बाद में संबंधित टिप्पणी को कार्यवाही से हटा दिया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सदन में शब्दों के चयन को लेकर संवेदनशीलता बनी हुई है।
अपने भाषण के अंतिम हिस्से में प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री की सार्वजनिक संचार शैली पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं, विशेषकर नई पीढ़ी से जुड़ना है, तो केवल कैमरे के माध्यम से नहीं बल्कि लोगों की भावनाओं और समस्याओं को समझकर जुड़ना होगा। इस टिप्पणी पर विपक्षी सांसदों ने मेज थपथपाई, जबकि सत्ता पक्ष ने इसका विरोध किया। सदन में कुछ देर तक शोरगुल की स्थिति बनी रही।
बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने अपने संबोधन में विपक्ष पर भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक संस्थाओं का सम्मान न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ना कोई अपराध नहीं है और इस पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से देशहित और सकारात्मक राजनीति पर ध्यान देने की अपील की। उनके बयान पर विपक्षी सांसदों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन में फिर से तीखी बहस शुरू हो गई।
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने अपने भाषण में कवि दुष्यंत कुमार की पंक्तियां उद्धृत करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जमीन से कटकर राजनीति करने वालों को वास्तविक परिस्थितियों का अंदाजा नहीं रहता। उनके इस साहित्यिक संदर्भ ने बहस को कुछ समय के लिए अलग दिशा दी, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहा।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चर्चा के दौरान सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तभी आएगी जब सरकार पूरी ईमानदारी से सुधार लागू करेगी। संसद परिसर में वे एक बुकलेट भी लेकर पहुंचे, जिसमें पिछले वर्षों में हुए कथित पेपर लीक मामलों का उल्लेख था। उन्होंने अपने भाषण में कई परीक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि युवाओं का भरोसा बहाल करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सत्ता पक्ष ने विधेयक को छात्रों के हित में उठाया गया जरूरी कदम बताया।

