कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन बुधवार को लगातार 33वें दिन भी जारी रहा। सुबह से ही बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे और अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पूरे दिन नारेबाजी, संबोधन और विभिन्न संगठनों के समर्थन के बीच प्रदर्शन का माहौल बना रहा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भी बड़ी तैनाती की गई।
बुधवार को आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव सामने आया, लेकिन CJP ने इसे मौजूदा स्वरूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि उन्हें सरकार की ओर से बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि संगठन का कोई प्रतिनिधि किसी मंत्री के आवास या सरकारी कार्यालय में बातचीत के लिए नहीं जाएगा। उनका कहना था कि यदि सरकार वास्तव में समाधान चाहती है तो बातचीत जंतर-मंतर या उसके आसपास किसी तटस्थ स्थान पर होनी चाहिए, ताकि आंदोलन से जुड़े लोगों का विश्वास बना रहे और वार्ता पारदर्शी तरीके से हो सके।
सौरव दास ने यह भी कहा कि केवल औपचारिक बातचीत के लिए बुलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के लिए तैयार है या नहीं। उन्होंने कहा कि हजारों छात्र और युवा कई दिनों से आंदोलन में शामिल हैं, इसलिए किसी भी वार्ता का उद्देश्य स्पष्ट और परिणाम आधारित होना चाहिए। उनका दावा था कि जब तक ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा।




इसी बीच CJP से जुड़े अभिजीत दीपके ने आंदोलन को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने सोनम वांगचुक से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अपना अनशन समाप्त करने की अपील की। दीपके ने कहा कि देश को वांगचुक जैसे लोगों की आवश्यकता है और उनका स्वस्थ रहना आंदोलन के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन का शांतिपूर्ण प्रदर्शन पहले की तरह जारी रहेगा तथा सभी कार्यकर्ताओं से अनुशासन बनाए रखने और अहिंसक तरीके से अपनी बात रखने का आग्रह किया गया है।
प्रदर्शन के दौरान CJP नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि हाल के दिनों में पुलिस द्वारा छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की गई। संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग उचित नहीं था। पार्टी नेताओं ने कहा कि आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किया जा रहा है और सभी प्रदर्शनकारी संविधान के दायरे में रहकर अपनी मांगें उठा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि प्रदर्शन को कानून-व्यवस्था की समस्या के बजाय लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाए।
दिल्ली में आंदोलन के चलते सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक जवानों की तैनाती की गई। इसी क्रम में राजधानी के 16 मेट्रो स्टेशनों को एहतियात के तौर पर बंद रखा गया ताकि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो। पुलिस ने प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग भी की तथा संसद क्षेत्र और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उठाए गए हैं।
इस बीच दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हुई एक हिंसक घटना को लेकर भी कार्रवाई शुरू की। पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर RAF के एक जवान पर कथित हमले, सरकारी वाहन पर पथराव और तोड़फोड़ के मामले में FIR दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है तथा घटना में शामिल लोगों की पहचान की जाएगी। वहीं आंदोलन से जुड़े नेताओं ने अपने स्तर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने की बात दोहराई और हिंसा से दूरी बनाए रखने की अपील की।
आंदोलन को लेकर कई राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। विभिन्न दलों के नेताओं ने छात्रों और प्रदर्शनकारियों के मुद्दों पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए। कुछ नेताओं ने आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही, जबकि कुछ ने शिक्षा व्यवस्था और संबंधित मामलों पर जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। इस कारण जंतर-मंतर का प्रदर्शन केवल एक धरने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का भी प्रमुख विषय बन गया।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का माहौल पूरे दिन सक्रिय बना रहा। देश के अलग-अलग राज्यों से आए लोग आंदोलन में शामिल हुए और कई सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन, पानी तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की। मंच से लगातार संबोधन होते रहे और आंदोलन के अगले चरण की रणनीति पर भी चर्चा की गई। संगठन का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से धरना जारी रहेगा। दूसरी ओर प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सतर्क हैं।

