देश के पांच राज्यों में चल रही मतगणना ने शुरुआती घंटों में ही सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी—इन सभी राज्यों की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है, लेकिन जो रुझान सामने आ रहे हैं, वे कई जगहों पर अप्रत्याशित मोड़ लेते दिख रहे हैं।
तमिलनाडु में सबसे ज्यादा चर्चा एक नई एंट्री को लेकर है। अभिनेता विजय की पार्टी TVK, जो अभी कुछ समय पहले ही राजनीति में उतरी है, रुझानों में 100 से ज्यादा सीटों पर आगे दिखाई दे रही है। इस बढ़त ने राज्य की पारंपरिक राजनीतिक लड़ाई को अचानक दिलचस्प बना दिया है।
उधर केरल में सत्ता बदलने के संकेत मिल रहे हैं। करीब एक दशक से बाहर रही UDF गठबंधन फिर से वापसी की स्थिति में नजर आ रही है। कांग्रेस, मुस्लिम लीग और केरल कांग्रेस के घटक दलों के साथ यह गठबंधन कई सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और कुछ जगहों पर जीत भी दर्ज कर चुका है।
रुझानों का असर MP में, कार्यकर्ता सड़कों पर
इन रुझानों का असर सिर्फ संबंधित राज्यों तक सीमित नहीं रहा। मध्य प्रदेश में भी भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों ने इसे उत्सव में बदल दिया है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे शहरों में पार्टी कार्यालयों के बाहर भीड़ जुटने लगी।
कहीं झालमुड़ी बांटी जा रही है, तो कहीं ढोल-नगाड़ों के साथ नाच-गाना हो रहा है। पटाखों की आवाज और नारों के बीच कार्यकर्ता अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं।
सीएम बोले—त्योहार जैसा माहौल
ग्वालियर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि माहौल किसी बड़े त्योहार जैसा है। उन्होंने इसे अहंकार की हार और राष्ट्रवाद की जीत बताया।
पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां की जनता ने अपना रुख स्पष्ट किया है और भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा जताया है।
खंडेलवाल का तंज, कोलकाता से जोड़ा जिक्र
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इन रुझानों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पार्टी अब देश के राजनीतिक परिदृश्य से लगभग गायब हो रही है। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि कोलकाता से पारिवारिक जुड़ाव होने के कारण झालमुड़ी उनके लिए नई बात नहीं है। जश्न की तैयारियां पहले से की गई थीं, जिनमें पटाखों का इंतजाम भी शामिल था।
विजयवर्गीय की आंखें नम, बोले—ये सिर्फ जीत नहीं
इंदौर में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मीडिया से बात करते हुए भावुक नजर आए। उन्होंने इस बढ़त को सामान्य राजनीतिक परिणाम से अलग बताया।
उनके मुताबिक, पश्चिम बंगाल में उन्हें जिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, वह बेहद कठिन था। कई मामलों और आरोपों के बीच भी कार्यकर्ताओं ने हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि आज जो स्थिति बनी है, वह उसी संघर्ष का नतीजा है। उनकी भावनाएं उस लड़ाई की याद से जुड़ी हैं, जिसमें कार्यकर्ताओं ने लगातार मेहनत की।
824 सीटों पर फैसला जारी
इन पांच राज्यों में कुल 824 सीटों के लिए मतदान हुआ था। इसमें पश्चिम बंगाल की 294, तमिलनाडु की 234, केरल की 140, असम की 126 और पुडुचेरी की 30 सीटें शामिल हैं।
हर राज्य में मुकाबले का स्वरूप अलग रहा—कहीं सीधा टकराव, तो कहीं बहुकोणीय संघर्ष। पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने हैं, जबकि तमिलनाडु में DMK गठबंधन और AIADMK-BJP के बीच मुकाबला है। केरल में LDF और UDF की पारंपरिक टक्कर है, असम में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं, जबकि पुडुचेरी में कई दल मैदान में हैं।
MP से भी पहुंचे थे नेता प्रचार में
इन चुनावों में मध्य प्रदेश के नेताओं की भी सक्रिय भागीदारी रही। भाजपा के कई वरिष्ठ नेता पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में प्रचार के लिए गए थे। पार्टी ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर अधिकतम सीटों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की रणनीति अपनाई।