कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कार्यप्रणाली, सदस्यता और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले किसी भी संगठन को संविधान और कानून के दायरे में रहकर जवाबदेह होना चाहिए। हरिप्रसाद ने संघ से अपने सदस्यों और वित्तीय स्रोतों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान हरिप्रसाद ने कहा कि कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे द्वारा उठाए गए सवाल पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी दायरे में हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज और संविधान का सम्मान प्रत्येक नागरिक और संगठन की जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि संविधान के नियमों का पालन न करना देश के हितों के खिलाफ माना जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने आरएसएस की संगठनात्मक संरचना पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि संघ स्वयं को दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन बताता है, लेकिन उसके सदस्यों की संख्या और पहचान को लेकर पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं है। हरिप्रसाद ने पूछा कि यदि संगठन इतना बड़ा है तो उसके सदस्यों और गतिविधियों का विवरण सार्वजनिक करने में क्या आपत्ति है।
उन्होंने संघ की आर्थिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बड़े संगठन के संचालन के लिए आने वाला धन कहां से आता है और उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाता है, यह जनता को पता होना चाहिए। उनके मुताबिक वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना का हिस्सा हैं और किसी भी संस्था को इससे अलग नहीं रखा जा सकता।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को खुला पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, वित्तीय स्रोतों और संवैधानिक जवाबदेही से जुड़े कई सवाल पूछे। खरगे ने कहा कि इतने बड़े संगठन को पारदर्शिता के उच्च मानकों का पालन करना चाहिए और जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
वहीं, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इन मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संघ को ऐसे राजनीतिक आरोपों और सवालों का जवाब देने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि आरएसएस लंबे समय से इस तरह की राजनीतिक आलोचनाओं का सामना करता आया है। भागवत ने यह भी तर्क दिया कि हिंदू धर्म स्वयं पंजीकृत संस्था नहीं है, इसलिए केवल पंजीकरण के आधार पर संगठन की वैधता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।